गुप्त साम्राज्य गुप्त साम्राज्य की स्थापना श्रीगुप्त के द्वारा की गयी थी। इस वंश का सबसे मह्त्वपूर्ण शाशक चन्द्रगुप्त प्रथम था। उसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी। चंद्र गुप्त प्रथम (३१९-३३५ ई.) चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्तवंश को एक साम्राज्य की प्रतिष्ठा प्रदान की। उसने को गुप्त सम्वत 320 ई. में शुरू किया था। इसे गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। चन्द्रगुप्त प्रथम ने अपने राजनितिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिये लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया था ,जो उस समय की मह्त्वपूर्ण घटना है। गुप्ता वंश में ही सर्वप्रथम चन्द्रगुप्त प्रथा देवरा रजत (चाँदी ) मुद्राओं का प्रचलन करवाया गया था। समुन्द्रगुप्त (350 -375 ई.) चन्द्रगुप्त प्रथम के बाद उसका पुत्र समुन्द्रगुप्त शाशक बना। उसके समय में गुप्त साम्राज्य का सबसे अद्दिक विस्तार हुआ। समुन्द्रगुप्त प्रथम ने उत्तर भारत के नो शाशको को पराजित किया पराजित राजाओं में नागसेन , अच्युत तथा गणपतिनाग थे। उसने उत्तर भारत पर प्रत्यक्ष रूप से शासन किया। और दक्षिण भारत के बार...
बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म का उदय छठी शताब्दी ई.पू. में हुआ था । गौतम बुद्ध का जीवन परिचय गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल की तराई में स्थित कपिलवस्तु लुम्बिनी ग्राम में हुआ था । इनका जन्म शाक्य गण के प्रधान शुद्धोधन के घर में हुआ था । इनकी माता का नाम महामाया था। जो कोलियगण की राजकुमारी थी । जन्म के सातवें दिन गौतम बुद्ध की माता का देहान्त हो जाने के कारण पालन पोषण इनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था। इनकी मौसी के नाम से ही सिद्धार्थ का नाम गौतम पड़ा था । 16वर्ष की अवस्था में सिद्धार्थ का विवाह शाक्य कुल की कन्या यशोधरा से हुआ। जिनका बौद्ध ग्रंथों में नाम बिम्बा, गोपा, भद्कच्छना मिलता है। इन्हें एक पुत्र हुआ जिसका नाम राहुल था । सांसारिक सुखों से व्यथित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में घर को त्याग दिया । बौद्ध धर्म में गृहत्याग को महाभिनिष्क्रमण कह ा गया है । गृहत्याग के बाद सिद्धार्थ ने अनोमा नदी के किनारे अपने सिर को मुंडवा कर भिक्षुओं का काषाय वस्त्र धारण किया । छ: वर्ष तक अथक परिश्रम एवं घ...
रैयतवाड़ी व्यवस्था की विशेषताएँ 1• इस व्यवस्था में किसानों को उपज का 1/2 भाग भू-राजस्व के रूप में देना था। 2• लगान की अदायगी न होने पर भूमि जब्त की जा सकती थी। 3• लगान अदायगी के प्रत्येक 30 वर्ष बाद पुनर्समीक्षा की जानी थी। 4• सरकार एवं किसानों के बीच कोई मध्यस्थ नहीं था। 5• भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया, जिससे वे भूमि का विक्रय कर सकते थे एवं गिरवी रख सकते थे।
This is my first blog . Actually i post this just to check . is it working or not.
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